Synopsis
Stories of Premchand narrated by various artists
Episodes
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Maila Aanchal | Part - 9 | A Novel by Phanishwar Nath 'Renu' | मैला आँचल | फणीश्वर नाथ 'रेणु' का लिखा उपन्यास
10/07/2022 Duration: 11minमैला आँचल फणीश्वर नाथ 'रेणु' का प्रतिनिधि उपन्यास है। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है। सन् १९५४ में प्रकाशित इस उपन्यास की कथा वस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। यह स्वतंत्र होते और उसके तुरन्त बाद के भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का ग्रामीण संस्करण है। रेणु के अनुसार इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है। मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया। इसमें ग़रीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, आडंबरों, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है। शिल्प की दृष्टि से इसमें फिल्म की तरह घटनाएं एक के बाद एक घटकर विलीन हो जाती है। और दूसरी प्रारंभ हो जाती है। इसमें घटना प्रधानता है किंतु कोई केन्द्रीय चरित्र या कथा नहीं है। इसमें नाटकीयता और किस्सा गोई शैली का प्रयोग किया गया है। इसे हिन्दी में आँचलिक उपन्या
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Maila Aanchal | Part - 8 | A Novel by Phanishwar Nath 'Renu' | मैला आँचल | फणीश्वर नाथ 'रेणु' का लिखा उपन्यास
10/07/2022 Duration: 15minमैला आँचल फणीश्वर नाथ 'रेणु' का प्रतिनिधि उपन्यास है। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है। सन् १९५४ में प्रकाशित इस उपन्यास की कथा वस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। यह स्वतंत्र होते और उसके तुरन्त बाद के भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का ग्रामीण संस्करण है। रेणु के अनुसार इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है। मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया। इसमें ग़रीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, आडंबरों, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है। शिल्प की दृष्टि से इसमें फिल्म की तरह घटनाएं एक के बाद एक घटकर विलीन हो जाती है। और दूसरी प्रारंभ हो जाती है। इसमें घटना प्रधानता है किंतु कोई केन्द्रीय चरित्र या कथा नहीं है। इसमें नाटकीयता और किस्सा गोई शैली का प्रयोग किया गया है। इसे हिन्दी में आँचलिक उपन्या
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Maila Aanchal | Part - 7 | A Novel by Phanishwar Nath 'Renu' | मैला आँचल | फणीश्वर नाथ 'रेणु' का लिखा उपन्यास
10/07/2022 Duration: 12minमैला आँचल फणीश्वर नाथ 'रेणु' का प्रतिनिधि उपन्यास है। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है। सन् १९५४ में प्रकाशित इस उपन्यास की कथा वस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। यह स्वतंत्र होते और उसके तुरन्त बाद के भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का ग्रामीण संस्करण है। रेणु के अनुसार इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है। मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया। इसमें ग़रीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, आडंबरों, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है। शिल्प की दृष्टि से इसमें फिल्म की तरह घटनाएं एक के बाद एक घटकर विलीन हो जाती है। और दूसरी प्रारंभ हो जाती है। इसमें घटना प्रधानता है किंतु कोई केन्द्रीय चरित्र या कथा नहीं है। इसमें नाटकीयता और किस्सा गोई शैली का प्रयोग किया गया है। इसे हिन्दी में आँचलिक उपन्या
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Maila Aanchal | Part - 6 | A Novel by Phanishwar Nath 'Renu' | मैला आँचल | फणीश्वर नाथ 'रेणु' का लिखा उपन्यास
10/07/2022 Duration: 14minमैला आँचल फणीश्वर नाथ 'रेणु' का प्रतिनिधि उपन्यास है। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है। सन् १९५४ में प्रकाशित इस उपन्यास की कथा वस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। यह स्वतंत्र होते और उसके तुरन्त बाद के भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का ग्रामीण संस्करण है। रेणु के अनुसार इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है। मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया। इसमें ग़रीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, आडंबरों, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है। शिल्प की दृष्टि से इसमें फिल्म की तरह घटनाएं एक के बाद एक घटकर विलीन हो जाती है। और दूसरी प्रारंभ हो जाती है। इसमें घटना प्रधानता है किंतु कोई केन्द्रीय चरित्र या कथा नहीं है। इसमें नाटकीयता और किस्सा गोई शैली का प्रयोग किया गया है। इसे हिन्दी में आँचलिक उपन्या
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Maila Aanchal | Part - 5 | A Novel by Phanishwar Nath 'Renu' | मैला आँचल | फणीश्वर नाथ 'रेणु' का लिखा उपन्यास
09/07/2022 Duration: 16minमैला आँचल फणीश्वर नाथ 'रेणु' का प्रतिनिधि उपन्यास है। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है। सन् १९५४ में प्रकाशित इस उपन्यास की कथा वस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। यह स्वतंत्र होते और उसके तुरन्त बाद के भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का ग्रामीण संस्करण है। रेणु के अनुसार इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है। मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया। इसमें ग़रीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, आडंबरों, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है। शिल्प की दृष्टि से इसमें फिल्म की तरह घटनाएं एक के बाद एक घटकर विलीन हो जाती है। और दूसरी प्रारंभ हो जाती है। इसमें घटना प्रधानता है किंतु कोई केन्द्रीय चरित्र या कथा नहीं है। इसमें नाटकीयता और किस्सा गोई शैली का प्रयोग किया गया है। इसे हिन्दी में आँचलिक उपन्या
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Maila Aanchal | Part - 4 | A Novel by Phanishwar Nath 'Renu' | मैला आँचल | फणीश्वर नाथ 'रेणु' का लिखा उपन्यास
09/07/2022 Duration: 18minमैला आँचल फणीश्वर नाथ 'रेणु' का प्रतिनिधि उपन्यास है। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है। सन् १९५४ में प्रकाशित इस उपन्यास की कथा वस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। यह स्वतंत्र होते और उसके तुरन्त बाद के भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का ग्रामीण संस्करण है। रेणु के अनुसार इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है। मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया। इसमें ग़रीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, आडंबरों, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है। शिल्प की दृष्टि से इसमें फिल्म की तरह घटनाएं एक के बाद एक घटकर विलीन हो जाती है। और दूसरी प्रारंभ हो जाती है। इसमें घटना प्रधानता है किंतु कोई केन्द्रीय चरित्र या कथा नहीं है। इसमें नाटकीयता और किस्सा गोई शैली का प्रयोग किया गया है। इसे हिन्दी में आँचलिक उपन्या
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Maila Aanchal | Part - 3 | A Novel by Phanishwar Nath 'Renu' | मैला आँचल | फणीश्वर नाथ 'रेणु' का लिखा उपन्यास
09/07/2022 Duration: 14minमैला आँचल फणीश्वर नाथ 'रेणु' का प्रतिनिधि उपन्यास है। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है। सन् १९५४ में प्रकाशित इस उपन्यास की कथा वस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। यह स्वतंत्र होते और उसके तुरन्त बाद के भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का ग्रामीण संस्करण है। रेणु के अनुसार इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है। मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया। इसमें ग़रीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, आडंबरों, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है। शिल्प की दृष्टि से इसमें फिल्म की तरह घटनाएं एक के बाद एक घटकर विलीन हो जाती है। और दूसरी प्रारंभ हो जाती है। इसमें घटना प्रधानता है किंतु कोई केन्द्रीय चरित्र या कथा नहीं है। इसमें नाटकीयता और किस्सा गोई शैली का प्रयोग किया गया है। इसे हिन्दी में आँचलिक उपन्या
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Maila Aanchal | Part - 2 | A Novel by Phanishwar Nath 'Renu' | मैला आँचल | फणीश्वर नाथ 'रेणु' का लिखा उपन्यास
09/07/2022 Duration: 14minमैला आँचल फणीश्वर नाथ 'रेणु' का प्रतिनिधि उपन्यास है। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है। सन् १९५४ में प्रकाशित इस उपन्यास की कथा वस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। यह स्वतंत्र होते और उसके तुरन्त बाद के भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का ग्रामीण संस्करण है। रेणु के अनुसार इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है। मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया। इसमें ग़रीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, आडंबरों, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है। शिल्प की दृष्टि से इसमें फिल्म की तरह घटनाएं एक के बाद एक घटकर विलीन हो जाती है। और दूसरी प्रारंभ हो जाती है। इसमें घटना प्रधानता है किंतु कोई केन्द्रीय चरित्र या कथा नहीं है। इसमें नाटकीयता और किस्सा गोई शैली का प्रयोग किया गया है। इसे हिन्दी में आँचलिक उपन्या
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Maila Aanchal | Part - 1 | A Novel by Phanishwar Nath 'Renu' | मैला आँचल | फणीश्वर नाथ 'रेणु' का लिखा उपन्यास
09/07/2022 Duration: 09minमैला आँचल फणीश्वर नाथ 'रेणु' का प्रतिनिधि उपन्यास है। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है। सन् १९५४ में प्रकाशित इस उपन्यास की कथा वस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। यह स्वतंत्र होते और उसके तुरन्त बाद के भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का ग्रामीण संस्करण है। रेणु के अनुसार इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है। मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया। इसमें ग़रीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, आडंबरों, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है। शिल्प की दृष्टि से इसमें फिल्म की तरह घटनाएं एक के बाद एक घटकर विलीन हो जाती है। और दूसरी प्रारंभ हो जाती है। इसमें घटना प्रधानता है किंतु कोई केन्द्रीय चरित्र या कथा नहीं है। इसमें नाटकीयता और किस्सा गोई शैली का प्रयोग किया गया है। इसे हिन्दी में आँचलिक उपन्या
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Chokher Bali | Part - 54 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
08/07/2022 Duration: 08minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com
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Chokher Bali | Part - 53 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
08/07/2022 Duration: 03minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com
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Chokher Bali | Part - 52 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
08/07/2022 Duration: 24minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com
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Chokher Bali | Part - 51 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
08/07/2022 Duration: 20minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com
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Chokher Bali | Part - 50 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
07/07/2022 Duration: 12minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com
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Chokher Bali | Part - 49 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
07/07/2022 Duration: 11minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com
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Chokher Bali | Part - 48 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
07/07/2022 Duration: 10minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com
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Chokher Bali | Part - 47 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
07/07/2022 Duration: 09minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com
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Chokher Bali | Part - 46 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
07/07/2022 Duration: 06minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com
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Chokher Bali | Part - 45 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
06/07/2022 Duration: 12minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com
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Chokher Bali | Part - 44 | Aankh Ki Kirkiri (Hindi) | Novel by Rabindranath Tagore | चोखेर बाली | आँख की किरकिरी (हिन्दी)
06/07/2022 Duration: 12minउपन्यास - आँख की किरकिरी (चोखेर बाली) Novel - Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) लेखक - रवीन्द्रनाथ टैगौर Writer - Rabindranath Tagore स्वर - समीर गोस्वामी Narration - Sameer Goswami https://kahanisuno.com/ http://instagram.com/sameergoswami_kahanisuno https://www.facebook.com/kahanisuno/ http://twitter.com/goswamisameer/ https://sameergoswami.com